सुबह ७ बजे माताश्री ने रोज की ही तरह फ़ोन करके पूछा कि “उठ गये” और हम भी रोज की तरह ’हाँ ’ कहके, २ मिनट नींद में ही बातें करके सो गये। ८ बजे मोबाईल में लगा अलार्म भी बजा… फ़िर हर १० मिनट पर बजता रहा… फिर शायद मेरे रूममेट ने उसे बंद किया… खैर…
बाहर झमाझम बारिश हो रही थी और मेरे बेड ने जैसे मुझे एक चुम्बक की मानिंद पकड़ा हुआ था। उठने की हर कोशिश नाकाम थी और आँखें बंद करके अपने सपने में ही ऑफिस निकलने की तैयारी कर रहे थे।
करीब साढ़े दस बजे इस स्वप्न संसार से बाहर आते हुए हमने बेड छोड़ा और किचेन में घुसते ही चाय चढ़ा दी और लैपटाप ऑन करके बैठ गये। खिड़की के बाहर घमासान बरसती बारिश और हाथों में अदरक की चाय… और ऎसे वक्त ऑफिस… कयामत हो…
बस आव देखा न ताव और फ़ेसबुक पर एक अपडेट मार दी कि ’हम काम क्यूं करते है – वाई डू वी वर्क?’
…… और फ़िर चुपचाप सर झुकाये ऑफिस चले गये…
अनुराग भाई ने उसी पर पूछा कि ’दूसरा आप्शन बताओ’ तो दिमाग के घोड़े दौड़ गये और बस एक फ़ितूर सोच लाये…
कुछ खास नही बस बैठे बिठाये हम सोच रहे थे कि काश सोचना भी एक योग्यता होती और हमें सोचने के पैसे मिलते……
…… और अगर मिलते तो ये दुनिया कैसी होती?
शादी की बातें कैसे होती?:
- लड़का क्या करता है?
बम्बई मे किसी बड़ी कंपनी में है… …’सोचता’ है…
- लड़की बहुत पढी लिखी है… गृहकार्य के साथ साथ उसे सोचना अच्छा लगता है… सोचने का होबी कोर्स भी किया है…
- हमारी सुशील कन्या के लिये एक सुन्दर वर चाहिये… सोचने वालों को वरीयता दी जायेगी…
इंटरव्यू कैसे होते?
- पहले कभी ’सोचा’ है?? हमारी कंपनी में वीकेंड पर भी ’सोचते’ हैं… क्या तुम इतना ’सोच’ पाओगे?
- तो आप पहले किस कंपनी में ’सोचते’ थे?
- अच्छा… तो आप पिछले दस सालों से ’सोचते’ हैं? क्वाईट इंट्रेस्टिंग …
- अच्छा प्रोफ़ाईल है आपका… तो अभी तक आप किन किन चीज़ो पर सोच चुके है??
- कुछ सोच के दिखाओ? (दो इंटरव्यूवर सोचते हुये सामने वाले से सवाल पूछते है)
दोस्तों में बातें कैसे होतीं?
- साला कॉलेज में सोचने को कह दो तो गधे के हाँथ पाँव फ़ूल जाते थे… आज देखो फ़लाना कंपनी में है… पता नही कैसे सोचता होगा? वहाँ भी किसी सोचने वाले की कॉपी करता होगा …
- यार मैंने उनसे ६ लाख मांगे लेकिन वो बोले कि साढ़े पांच ही देंगे … लेकिन सीखने के लिये सोचने का इतना अच्छा प्लेटफ़ार्म भी तो दे रहे हैं…
- अबे कुछ सोचना सिखा न? सोच रहा हू इस बार सोचने का सर्टिफ़िकेशन क्लीयर कर ही लूं… तू तो सोचने में एक्सपर्ट है…
- (बार में टल्ली होकर सोच को गाली देते हुये) कहा था साले से दारू पीने आ जाना… लेकिन साले को सोचने से फ़ुर्सत मिले तब ना… अबे अब जितनी जरूरत है उतना सोचो…
पैरेन्टस से बातें कैसी होतीं?
- दिन भर अपने दोस्तों के साथ आवारागर्दी करते रहते हो… कभी बैठकर कुछ सोचते क्यूं नहीं??
- बेटा थोड़ा बहुत तू भी सोच लिया कर… देखता नहीं तेरे पिताजी अब सोचते सोचते कितना थक जाते है…
- शर्मा जी के लड़के को देखो… तुमसे छोटा है लेकिन अभी से सोचता है और तुम!
………… और ज़िंदगी यूं ही सोचते सोचते कट जाती ॥
पुनश्च:
शम्स जी के जुगाड़ में थोड़ा परिवर्तन करके टिप्पणियों का जवाब देने के लिये ब्लॉग से जोड़ लिया है… कुछ समय पहले ज्ञानजी ने इसको इम्प्लीमेन्ट किया था। आप सामान्य तरह से टिप्पणी कर सकते हैं!!