Sunday, August 2, 2009

द मोटरसाईकिल डायरीज…

ये फ़िल्म अर्नेस्टो गुवेरा की एक मोटरसाईकिल ट्रिप पर है जो बाद मे क्रान्तिकारी ची गुवेरा के नाम से जाने गये। अर्नेस्टो और उनके एक मित्र अलबर्टो ग्रेनाडो को एक कुष्ठ रोग के डाक्टर उनके पास रिसर्च के लिये बुलाते है। दोनो  वहा जाने के लिये मोटरसाईकिल से घूमने की योजना बनाते है और पूरे साउथ अमेरिका को घूमते हुए वहा पहुचते है। अपनी इस यात्रा मे वो अर्जेन्टीना, चिली, पेरू, कोलम्बिया और वेनेजुएला से गुजरते है।

 motorcycle

ये कहानी दो युवा लडको की कहानी है जो एडवेन्चर ढूढ रहे  है और इस ट्रिप के जरिये उसे पाने की कोशिश करते है। लेकिन कुष्ठ रोगियो तक पहुन्चने से पहले उन्हे असल ज़ीवन और लोगो का अहसास हो चुका होता है। इस ट्रिप मे वो गरीबो के हालात देखते है, उन पर हो रहे अन्याय को महसूस करते है और अपने तरीको से उनकी मदद करने की कोशिश करते है……

फ़िल्म का समापन बहुत मर्म है जब ची अस्थ्मा के बावजूद भी सिर्फ़ अपना जन्मदिन कुष्ठ रोगियो के साथ मनाने के लिये एक नदी तैर कर पार करते है जिसने उस गाव को दो भागो मे बांटा हुआ होता है – एक कुष्ठ रोगीयो का और एक निरोगियो का। ची उस नदी को पार करके विभाजन को तोड्ने की कोशिश करते है।

ये यात्रा दोनो दोस्तो को ज़िन्दगी की सच्चाई दिखाती है और शायद एक डाक्टर अर्नेस्टो गुवेरा को क्रान्तिकारी ची गुवेरा बनाती है जो बाद मे विरोधियो के द्वारा मार दिये जाते है।

Wednesday, July 29, 2009

हीरो…

ऐसे न जाने कितने लोग है, जो हमे कुछ सोन्चने के लिये बाध्य करते है.. कुछ करने के लिये। ऐसे ही एक है, आनन्द कुमार जी जो गरीबो को भी IITs के सपने दिखाते है और उन्हे पूरा करने मे अपना सब कुछ समरपित कर देते है।

कल उनके बारे मे The National  मे एक article पढा। ऐसे लोगो को पढ्कर ज़िन्दगी मे कुछ करने की इच्छा जागती है……

http://www.thenational.ae/apps/pbcs.dll/article?.AID=/20090725/FOREIGN/707249814/1001

हमारी मीडिया ऐसे लोगो को सामने क्यू नही लाती? यही लोग हमारे real assets है, हमे ऐसे लोग पैदा करने चाहिये, इन्हे आगे लाना चाहिये तभी शायद हम एक विकसित भारत के बारे मे सोच सकते है……

आनन्द जी, आपको मेरा शत शत नमन……