Sunday, April 18, 2010

तुरई पुराण…

४ दिन पहले तुरई/तरोई खाने का बहुत मन कर रहा था… बनाये भी, खाये भी और साथ मे बज़ पर बजबजाये भी… ससुर (अजदक बाबा का फ़ेव शब्द) अब तक कोई न कोई उसपर टुनटुनाये जा रहा है…

 

आप भी इस तुरई पुराण का लुत्फ़ उठाईये, टुनटुनाईये/बज़बज़ाईये और देखिये की छोटी छोटी बाते भी ज़िन्दगी मे कितना तुरई - स्वाद लाती है… :)

 

हम तो चले फ़िर से तुरई बनाने :)

 

 

अभी तुरई की सब्जी बनाने जा रहा हू... यहा के रेस्टरा मे न जाने तुरई क्यू नही मिलती है :D

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Stuti Pandey - तुरई यहाँ पे मिलती है! :)Apr 14

Manisha Pandey - अब रेस्‍तरां में जाकर भी तुम तुरई ही खाना चाहो तो तुम्‍हारा भगवान ही मालिक है। तुरई कोई खाने की सब्‍जी होती है। इतनी बेकार।Apr 14

Praveen Pandey - तुरई पौष्टिक तो है । बाहर तो हम वही जाकर खाते हैं जो घर में बनाना कठिन होता है । जैसे पिज्जा व चाइनीज़ ।
बाहर के 70 रु के पराठे से घर का तो बहुत अच्छा होता है ।Apr 14

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI - तुरई ....शायद तरोई है जिसे चिकने और नसहे दो रूपों में जाना जाता है .......चिकनी वाले को तो इलाहाबाद में घिया कहते थे शायद ?
काहे मनीषा जी ?
बाकी तो हम रेस्टोरेंट में केवल किसी की जेब हल्की करने या अपनी करवाने ही जाते हैं !
सच्ची कसम से !Apr 14

Pankaj Upadhyay - घर की तरोई/तुरई ज़िन्दाबाद... पौष्टिकता अमर रहे.. सिकुड के इतनी रह गयी थी कि लगा की म्यूज़ियम मे लगा दे.. अचार की तरह से फ़िर सब्जी खायी गयी..
अभी कुल्फ़ी का प्लान है.. रात की कुल्फ़ी खाने बोरीवली - वेस्ट जा रहे है... :DApr 14

Stuti Pandey - हा हा ... तुरई हवा की तरह गायब हो जाती है कडाही में जाते ही! इसलिए उसमे थोडा सा चना दाल ड़ाल के बनाया जाता है - क्वान्टिटी बढ़ने के लिएApr 14

Prashant Priyadarshi - हम इंतजार कर रहे हैं कि आज कुल्फी वाला आता है कि नहीं.. :D
लगभग हर रोज इसी समय यहाँ से गुजरता है..Apr 14

Prashant Priyadarshi - यहाँ तुरई होटल-हाट कहीं भी नहीं मिलता है.. :(Apr 14

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI - :)
ई गुरु अब सही चीज लाये हो निकाल के !
नेनुआ
हाँ यही तो इलाहाबादी नाम है !
घिया के लिए मुआफी !
प्राइमरी के हैये हाँ !
वहु पूरी ठसक से !Apr 14

Manisha Pandey - बेशरम, अकेले-अकेले कुल्‍फी। मैं मुंबई में थी तो एक बार भी मुंह से नहीं निकला कि बोरीवली वेस्‍ट आ जाओ, तुम्‍हें कुल्‍फी तो खिला दूं कम से कम। नहीं, सवालै पैदा नहीं होता। अब जनाब कुल्‍फी चाभेंगे। भगवान करे, देही में लगे ही नहीं। पेट खराब हो जाए।Apr 14

Prashant Priyadarshi - टेंसन मत लो मनीषा.. उसे नहीं मिलेगा.. वो तो सिर्फ चेन्नई में मेरे घर के बाहर मिलता है इस समय..Apr 14

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI - ऐ भैया ई गुरु !
ज़रा हमको लखनवी प्रकाश कुल्फी का फोटो तो दिखाओ
इन्हा सब ललचवा रहें है !Apr 14

Pankaj Upadhyay - हा हा हा :)
मनीषा - मैने सबको बोल रखा है कि मैने तुम्हे इनआर्बिट के पीछे कुल्फ़ी खिलायी है.. अब झूठ बोलकर मेरा नाम मत खराब करो!
पीडी जी - मै तो चला कुल्फ़ी खाने.. :)
मास्साब - :) फ़ोटुवा तो हमारे इस CDMA वाले डब्बे से नही आयेगी.. ब्लैकबेरी लेने दीजिये, फ़िर भेजते है.. और ’नेनुआ’ ही तो असल नाम है.. :DApr 15

Stuti Pandey - इ लीजिये... हम इहाँ वाले का दरसन करवाते हैं - दुकान का नाम है "cold stone creamery" गजबे का स्वाद रहता है !
http://z.about.com/d/raleighdurham/1/0/s/0/-/-/cold-stone.jpgApr 15

100 din - https://mail.google.com/mail/?shva=1#buzz/114995198774335996683
आप लोग समझ लीं कि ई कुल्फी ई-गुरु की तरफ से है, हम समझ सकत हैं ऊ अपने आठ ब्लॉग में बिजी होइहयं.Apr 15

Prashant Priyadarshi - ए स्तुति.. काहे चिढा रही है रे? पटने में घर है ना? आओगी तो खियार के मारेंगे.. :(Apr 15

Stuti Pandey - हा हा ...ऐ परसांत ..काहे ;ला टिडिंग भिडिंग कर रहे हो... जरंती हो रहा है का? जहिया आयेंगे तहिया न ? तब देखल जायेगा :-DApr 15

Prashant Priyadarshi - चलो जाओ कामिक्स पढ़ो.. नयका बला कामिक्स भेज रहे हैं.. :DApr 15

Stuti Pandey - हाँ...हाली हाली भेजोApr 15

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI - @ 100 दिन !
भैया वा प्रकाश कुल्फी का असली फोटूवा या लिंक मा है
http://aromacookery.com/wp-content/uploads/2008/05/vintageindia_08.jpgApr 15

Sanjeet Tripathi - aur kauno sabji nai mili torai ke alava, ek no k mamu ho yar...i hate this sabji....
;)Apr 15

Pankaj Upadhyay - बाहर निकले तो अमूल का शो-रूम अभी भी खुला हुआ था लेकिन अब सोचे थे कि वेस्ट जाना है तो गये वेस्ट ही.. बटर स्काच खाये और साथ मे फ़ालूदा भी.. अब पेट अच्छा लुक दे रहा है.. सोया जाय..
@Sanjeet - ha ha.. अरे नही.. काफ़ी दिनो से नही खाये थे.. सोचा, चलो आज बनाते है.. बस तो बना के हम तो मगन हो लिये..
@पीडी - भैया, तुमरी कुल्फ़ी आयी की नही? इतना रस्ता तो किसी लडकी के लिये देखे होते तो वो आ गयी होती :DEditApr 15

Sanjeet Tripathi - kya yar ek to बटर स्काच aur upar se फ़ालूदा भी, sahi hai chidhao, chidhao....brahmin aadmi ki laar tapakwao.....;)Apr 15

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI - @Sanjeet Tripathi - पंडित जी ! की कीमती लार !!Apr 15

Manisha Pandey - @ pankaj - झूठे, कब खिलाई कुल्‍फी। इनऑर्बिट के पीछे तो जाने तो तुमने तो भैंस वाले तबेले के आगे भी नहीं खिलाई। ऐसे सार्वजनिक मंच से झूठ। तौबा-तौबा।Apr 15

Praveen Pandey - अब जो भी असत्य सिद्ध होगा, उसे सारे कमेंटकर्ताओं को कुल्फी खिलानी पड़ेगी । हमारी तिथि बता दी जाये, हम पहुँच जायेंगे ।Apr 15

पद‍्म सिंह - तुरई और नेनुआ में फरक ?? बताएगा कोई ?........... (नही तो हम बताऊं)Apr 15

पद‍्म सिंह - क्या हुआ बाबू ?Apr 15

Prashant Priyadarshi - Office में होगा जी.. काहे को परेशान कर रहे हैं बाबू को?Apr 15

Pankaj Upadhyay - @PD - haan ji office mein hi hain..
@ Padm Singh - bataiye saheb aap bhi bataiye.. wasie bhi aap jo batate hain, achha hi batate hain :DApr 15

पद‍्म सिंह - भईया लोगन !
हम कौनो सब्जी-गुरु तो हैं नहीं .... ई तो शादी करके सिखा दिए गए हैं (नून, तेल और गैस का दाम भी पता है)
वैसे तो दोनों को लोग एक ही चीज़ जानते हैं लेकिन थोड़ा सा फरक है .... नेनुआ चिकना और गहरे हरे रंग का होता है ... जब कि तोरई या तोरी की धारियां उठी हुई होती हैं और वो कम हरे रंग का होता है .... नेनुआ और तोरी में तोरी ज्यादा मंहगी होती है और सब्जी भी बेहतर बनती है .... ज्यादातर जगहों पर दोनों को तोरी ही कहते हैं .... (आवा समझ में)Apr 15

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI - तरोई ! मतलब नसही (तरोई की धारी) अधिक गुणकारी और फायदेमंद मानी जाती है ....सो मंहगी !Apr 15

Sameer Lal - तुरई तो हमें भी प्रिय है. वैसे कहते हैं कि तुरई पसंद आने लगे मतलब या तो घर से दूर हो या फिर उम्र बढ़ रही है. :)Apr 15

अजित वडनेरकर - तुरई, तोरी को जीरा और घी के साथ छौंकिए कि अहा अहा।
मछली को जल तुरई भी कहा जाता है:)Apr 15

पद‍्म सिंह - तुरई के छिलका की तल के सब्जी भी बहुत मजेदार बनती है .... सप्लीमेंट्री की तरहApr 16

Dr. Mahesh Sinha - राज रसोई का . बड़े बड़े विशेषज्ञ हैं यहाँ :)Apr 16

HIMANSHU MOHAN - ये तुरई…उफ़
ये पोस्ट लगता है म्यूट करनी पड़ेगी
हमारे घर में भी तुरई को खूब पसन्द किया जाता है।
और ये उबाल के बनती है - सो ये भी नहीं कह सकते कि "भाड़ में जाए तुरई"4:08 pm

Stuti Pandey - हमने कल रात को ही तुरई बनायीं थी थोड़ी बच गयी है, आज भी चलेगी!6:41 pm

Sanjeet Tripathi - राम-राम, और कौनो सब्जी नई मिली आपको?6:58 pm

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21 comments:

डॉ .अनुराग said...

तुरई खाते हो.....शरीफ आदमी हो.....

PD said...

सोचते हैं कि कभी मिले तो एक ठो बाल्टी लेकर आयेंगे.. जो शराफत चेहरे से टपकेगा उसे अपने लिए बचा कर रख लेंगे.. ;)

लवली कुमारी/Lovely kumari said...

:-)

Manoj K said...

meri mummy turai ke saath pyaj milakar banati hai... ultimate taste hota hai....

प्रवीण पाण्डेय said...

फिर चरस बोने चल दिये ।

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

@Anurag Ji:
उर्दु पहनने की कोशिश भी कर लेता हू कि बची खुची लफ़न्गी छुपी रहे :P
@PD:
गर्मी के सीजन मे आना.. आराम रहेगा..
@Manoj
भाई, कभी बुलाईये जलपान पे :P
@Praveen ji:
चरस है या धनिया.. ;)

mukti said...

ओह ! हमें तो ये तुरई/तरोई/नेनुआ बहुत पसन्द है...और बज़्ज़ की महिमा देखिये...तुरई जैसे विषय पर इतनी गहन चर्चा हो जाती है.

Udan Tashtari said...

नेनुआ- ई बात हुई न ठेठ पुरबिया!!

Sanjeet Tripathi said...

kya yar fir se तुरई banane chal diye, sudhar jao na mamu ;)

ab se tumhari तुरई puran pe no comments!

प्रवीण पाण्डेय said...

@ Pankaj
सबको नशा जो चढ़ा दिये हैं तुरई का ।

संजय भास्कर said...

तुरई खाते हो.....शरीफ आदमी हो.....

Manoj K said...

hardik swagat hai bandhu, vaise bhi hum rajasthanvale mehmaannawazi ke bahut shaukeen hai...

सुशील कुमार छौक्कर said...

अजी हम शुध तुरई की बात करेगे जी। वैसे तुरई में नींबू डालकर खाओ तो और भी स्वादिष्ट लगती है:)

प्रियदर्शिनी तिवारी said...

TURAI HAMARI PASANDIDA SABJI HAI... PADHHKAR MAJA AAYA..

प्रियदर्शिनी तिवारी said...

TURAI HAMARI PASANDIDA SABJI HAI.. PADHHKAR MAJA AAYA..

सागर नाहर said...

तुरई!!!
हमारे साथ तो इसका ना जाने किस जनम का बैर है जब कभी भी बनाने की कोशिश की इसने धोखा ही दिया। कम्बख्त यह और एक शिमला मिर्च ही है जो हमें कभी कुशल रसोईया नहीं बनने देने की कसम खाये बैठी हैं।
हमारे साथ इस मुई तुरई और शिमला मिर्च का प्रयोग हमेशा<a href="http://nahar.wordpress.com/2010/04/11/shimala-mirch-curry>लोगों को हंसाने </a>और हमें रुलाने वाला ही रहा।

कुश said...

"तुरई खानी तो आती है पर बनानी नहीं..

अनूप शुक्ल said...

ये तुरई पुराण बांच चुके थे। अब बता भी दिये!

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

are bhaiya buzz pe uga diye nenua ..ye hui na badhiya dhansu baat ...jkai din se ye post pdhne ki soch raha tha..par itna dhairy aaj aa paya...aur aaya to poora mazaa aayaa....:)

Vivek Rastogi said...

सोच रहे हैं कि कल सुबह ई तुरई बनायी जाई

Puja said...

हम तो नेनुआ और झिन्गली बोलते हैं, बाकी तोरई के फेर में नहीं पड़े हैं आज तक. इधर मिलता भी नहीं है.
और हमको हेल्दी खाने से अलर्जी है, डॉक्टर ने हरी सब्जी खाने से मना किया है, कहता है स्वाद के लिए अच्छा नहीं है ;)