Monday, November 30, 2009

वो गुल्लक फ़ोड आया!!

bhojan

कुछ दुआये
मै एक गुल्लक मे
रखता था..
चन्द कौडिया थी,
रहमतो मे लिपटी हुयी..
बुजुर्गो ने बरकते दी थी..

 

उस बूढे फ़कीर ने,
जब सर पे हाथ रखा,
दुआ दी कि एक अच्छे इन्सा
बने रहना…
वो सारी कौडिया मै
उसके कासे मे डाल आया…..

आज…
आज मै वो गुल्लक फ़ोड आया…….॥

18 comments:

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

bahut sunder kavita..... man ko choo gayi.....

Dankiya said...

bahut achhi kavita..chhoo gai dil ko!! sadhuvad

kabhi mere blog par bhi aayen.. swagat hai..!!

Dankiya said...

bahut achhi kavita..chhoo gai dil ko!! sadhuvad

kabhi mere blog par bhi aayen.. swagat hai..!!

Dankiya said...
This comment has been removed by a blog administrator.
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Sudhir Sharma said...

bahut achhii kavita!! badhai!! kabhi mere blog par bhi aayen!!http://dankiya.blogspot.com/

Udan Tashtari said...

बहुत ही गहरी और भावपूर्ण!!

RAJNISH PARIHAR said...

गुल्लक फोड़ कर आपने एक नेक काम किया है...इसलिए बधाई...

रश्मि प्रभा... said...

बहुत ही बढ़िया....यह गुल्लक बहुत अच्छी है

डॉ .अनुराग said...

sach kaha jameer ab utna pavitr nahi raha......

रंजू भाटिया said...

बहुत बढ़िया ..गहरे भावों से सजी है आपकी यह रचना शुक्रिया

Invi said...

thank you for this! its always pleasure visiting your blogs! Kamaal hae aap :) Hugs!

Gyan Dutt Pandey said...

सच्चा सौदा कर लिया मित्र आपने!

Kapil Sharma said...

classyy!!!! bahut acche upadhyayji!!!

अनूप शुक्ल said...

कांसा शब्द पढ़कर राहत इंदौरी का यह शेर याद आ गया:
वो खरीदना चाहता था कांसा मेरा
मैं उसके ताज की कीमत लगाकर लौट आया।

Riya Sharma said...

उस बूढे फ़कीर ने,
जब सर पे हाथ रखा,
दुआ दी कि एक अच्छे इन्सा
बने रहना…
वो सारी कौडिया मै
उसके कासे मे डाल आया….

wonderful!

अनूप शुक्ल said...

वाह! ये तो बांच चुके थे।

richa said...

b'ful thought...
गुल्लक है या दुआओं का ख़ज़ाना... ऐसी एक गुल्लक तोड़ोगे तो हज़ार भर जायेंगी :)