Wednesday, October 7, 2009

सिगरेट..

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सिगरेट के धुये मे,
कुछ शक्ले दिखती है,
मुझसे बाते करती हुयी,
कुछ चुप चाप.....
और सिगरेट जलती जाती है...
जैसे वक्त जल रहा हो,

 

 

गये वक्त को मै,
ऎश की तरह झाड देता हू
और वो माटी के साथ मिल जाता है,
खो जाता है उसी मे कही......

बस होठो पर एक रुमानी
अहसास होता है,

कहते है कि वक्त को जलाने का भी
अपना ही मज़ा है......

10 comments:

M VERMA said...

गहरी सोच लिये शानदार रचना

अजय कुमार झा said...

उफ़्फ़ क्या क्या न कह डाला आपने ये कह कर कि वक्त को जलाने का अपना ही मजा है....

Mithilesh dubey said...

अरे भाई जी यूं समय को ना जलाइये

Harkirat Haqeer said...

कहते है कि वक्त को जलाने का भी
अपना ही मज़ा है......

Bas inhin do panktiyon ne kavita ko ucch shreni mein la khda kiya .....!!

jaise aapne meri nazm pe kahaa end sarahniy hai usi tarah aapka bhi end lajwaab hai ......!!

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वक़्त हमें जलाता है जी :) पर आपकी रचना बहुत पसंद आई ..खासकर बस होठो पर एक रुमानी
अहसास होता है, कहते है कि वक्त को जलाने का भी
अपना ही मज़ा है...... बहुत खूब यही रूमानी एहसास रहे ....

Mrs. Asha Joglekar said...

कहते है कि वक्त को जलाने का भी
अपना ही मज़ा है......
वाह वाह बहुत उम्दा ।

Aniket Kulkarni said...

एक सिगरेट को इस नज़रिए से कभी जाना नही था. शुरुआती कुछ पंक्तियाँ ही पढ़ के ही खूब महसूस हुआ, और कविता का अंत तो...

anuj said...

My favoritr line is " Bus kuch rumani ehsaas reh jata hai"...waise to main kabhi gujre waqt ke bare me sonchta nahi per kabhi kabhar jab kuch panktiyan padhne ko mil jati jisme joi apne past ke bare me sonch raha hota hai to main sonchne lagta hun ki kya main sahi ker raha hun....tumhari is line ne fir se sonchne per mmajboor ker diya...
Sahi kehte hain ki inspiration kahin se abhi aa sakti hai n tumahri cirgrette se aa gayi....well written

richa said...

कहते है कि वक्त को जलाने का भी
अपना ही मज़ा है....

काफ़ी देर से जला रही हूँ :) gud one again !!!

अनूप शुक्ल said...

अभी तक सुलग रही है भाई!