Wednesday, June 3, 2009

मै ही क्यू??

अभी कुछ दिन पहले कि ही बात है जब एक अच्छी खासी शाम को किसी कमीनी चिडिया ने मेरी नयी नयी टी शर्ट पर छी छी कर दी :( मैने हमेशा की तरह ऊपर देखा और पूछा कि मै हि क्यु??

वैसे ये सब मेरे साथ होना बडी ही आम बात है। मै हमेशा कुछ भी करने से पहले काफी दुविधा मे रहता हू और हमेशा अपने आप को समझा लेता हू कि जो मैने किया वो सही था।

अगर मै कभी सुसाइड करना चाहू जैसे ट्रेन से कटना चाहू तो ट्रेन-स्ट्राइक हो जाय। ज़हर खाना चाहू तो वो नकली हो। पन्खे से लटकना चाहू तो बिज़ली चली जाय…

ये सब ख्याल मुझे सिर्फ़ इसलिये आ रहे है क्यूकि कल मैने सालो के बाद वो करना चाहा जो मै आजतक नही कर पाया था लेकिन …

मैने कल अपनी बहुत ही प्यार से बनायी हुई orkut profile delete कर दी और सबको अलविदा भी बोल दिया। लेकिन वो अभी तक delete नही हुई है…..

४८ घन्टे से पहले मै orkut वालो को भी नही contact कर सकता ऐसा उनकी site पर लिखा हुआ है और मेरे दोस्त, मेरे प्यारे दोस्त मुझे इस बात पर ताने मार रहे है :)

6 comments:

Mrs. Asha Joglekar said...

अच्छा सोचो फिर देखो अच्छा ही होगा ।

Pankaj Upadhyay said...

जी सही कहा आपने :)

Pankaj Upadhyay said...

wasie inhe dekhkar ahsaas hua ki hum akele nahin.. Inke ooper se to train bhi nikal gayee, phir bhi bach gayeen..

http://www.youtube.com/watch?v=iDeBCsWhTbg

anuj said...

पन्खे से लटकना चाहू तो बिज़ली चली जाय.....agar light chali bhi jaye to tumhe latkne me kya problem hai...hawa khate khate merna chahte ho kya???

मनीषा पांडे said...

@ अनुज, ठीक कह रहे हैं आप। लटकने के लिए लाइट की क्‍या जरूरत।
और एक ट्रेन की स्‍ट्राइक होगी तो दूसरी आ जाएगी। नहीं तो तीसरी।
और बेचारी चिड़िया को इतना क्‍या बुरा-भला कहना। उसे तुम और तुम्‍हारी टी शर्ट दोनों ही पसंद आ गए होंगे। सो उसने भी लाड़ लुटा दिया।

अनूप शुक्ल said...

जब कभी ट्रेन और पंखे का उपयोग करने का मन करे तब यह पोस्ट देखना